//// कल सपने में देखा था तुझे ////

दुनिया से दूर
उस तेज बारिश मे खुद को छुपा कर,,
हालात से मजबूर
आँसुओं से अपनी आँखें भिगोकर,,
एक पेड़ के नीचे
खुद को समेटता  हुआ. . .
कल सपने में देखा था तुझे//

जिसे है अपने नाम से प्यार बहुत,,
और दुनिया को  जीतने की अलग सी  चाहत//
जो है अपनों  में मशहूर बहुत
और दोस्तों के  दिलों की राहत//
खुद ही  को ठुकराता,
और नाम को खुद के  मिटटी  मे बिगड़ता . . .
कल सपने में देखा था तुझे//


था कोई तो  अंतर सा,,
उन  आँसू  और बारिश के  पानी मे//
एक अलग  सी कशिश  थी  तेरी सीरत,,
और उस  लड़की  की  कहानी  में//
आँखें और मायूस चेहरा,,
तेरी ही परछाई को नकारता. . . 
कल सपने में देखा था तुझे//

खुल उठी आँखें
और ना रोक  पाया मैं खुद को,,
क्या जानता हु मैं तुझे ??

जो सूरत  तुने  दुनिया  को है दिखाई,,
और जो हे सच में चेहरा तेरा  
क्या पेहेंचाता हूँ मैं उसे??

क्यों  बता  ना  पाईं तू  मुझे,,
जब हूँ  मैं  हमेशा साथ तेरे. . .

है  यकीन  मुझे, जो देखा बंद आंखों से मेंने
क्योंकि खुद ही के कफ़न को फूलों से  सजाते. . .
कल सपने में देखा था तुझे//

~ ~ ~ नूपुर ~ ~ ~