किसे यहाँ ख़ुशी मिली पूरी-पूरी,सबने तो जिंदगी जी है अधूरी
राहों में ही हार मान बैठे,और फिर कहते है मजबूरी है मेरी!!
चाहते हो लहरों का मजा,पर ढूब जाने के डर से समुन्दर में नही जाती कश्ती तेरी,
हर चीज़ थोड़ी थोड़ी कर ली,किसी ने नही जाना क्यों पूरी न हुई तम्मना तेरी!!

बचपन जिया जवानी के इन्तेजार में,जवानी आई तो बचपन को रो दिया,
सिरहाने रखी माँ की तस्वीर और महबूब की बाहों में रो दिया!!
हिसाब लगाया जब फुर्सत में तो पता चला,
क्या जिंदगी से पाया और क्या क्या खो दिया!!

जिसने कहा था, ये राह चुन लो अच्छी है,
आज उसी राह में,उसी को खो दिया,
ज़माने को रास्ता दिखाया था, जिन आँखों से,
आज उन्ही आँखों से,ज़माने को भुला दिया!!

तनहा रोती रह गयी खुशिया मेरी,
और मैंने गमो को ही जिंदगी समझ लिया!!
कितनी बड़ी भूल हो गयी यारो,
जिन्दी को मौत, और मौत को जिंदगी समझ लिया!!